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{} पाली में कन्या महाविद्यालय बने 30 साल गुजर चुके हैं। महाविद्यालय की दीवारें व छत अब उम्र दराज हो गई हैं। छतों व दीवारों से कभी भी प्लास्टर के स्लेब गिर जाते हैं। छत पर जाने वाले सीढि़यों पर छत से गिरे प्लास्टर का ढेर लगा है। हालात यह है कि बालिकाएं जर्जर हो चुके बरामदों, शौचालय व कक्षा-कक्षों में जाने तक से कतराती हैं, लेकिन मजबूरी में उनको उस झूलते खौफ के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है।पाली में कन्या महाविद्यालय बने 30 साल गुजर चुके हैं। महाविद्यालय की दीवारें व छत अब उम्र दराज हो गई हैं। छतों व दीवारों से कभी भी प्लास्टर के स्लेब गिर जाते हैं। छत पर जाने वाले सीढि़यों पर छत से गिरे प्लास्टर का ढेर लगा है। हालात यह है कि बालिकाएं जर्जर हो चुके बरामदों, शौचालय व कक्षा-कक्षों में जाने तक से कतराती हैं, लेकिन मजबूरी में उनको उस झूलते खौफ के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है।2025-06-27T13:23:57.000Z fromPali News : कन्या महाविद्यालय की हर छत कह रही, मैं हो चुकी उम्र दराज…
पाली में कन्या महाविद्यालय बने 30 साल गुजर चुके हैं। महाविद्यालय की दीवारें व छत अब उम्र दराज हो गई हैं। छतों व दीवारों से कभी भी प्लास्टर के स्लेब गिर जाते हैं। छत पर जाने वाले सीढि़यों पर छत से गिरे प्लास्टर का ढेर लगा है। हालात यह है कि बालिकाएं जर्जर हो चुके बरामदों, शौचालय व कक्षा-कक्षों में जाने तक से कतराती हैं, लेकिन मजबूरी में उनको उस झूलते खौफ के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है।
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