रांची। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के द्वारा काव्य-संग्रह "सुनो न! मन की..." का लोकार्पण किया गया। इस किताब की लेखिका पुष्पा सहाय 'गिन्नी' एक जानी-मानी कवयित्री हैं और उनका ये दूसरा काव्य संग्रह है। पुस्तक लोकार्पण के इस कार्यक्रम में संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में झारखंड रत्न डॉक्टर सुरिंदर कौर नीलम, महिला काव्य मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष सारिका भूषण, विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, उधोगपति और समाजसेविका पूनम आनंद उपस्थित थीं। इस कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई।
इस अवसर पर पुष्पा सहाय ने अपने मन के भावों को लोगों के समक्ष रखा कि किस तरह एक-एक एहसास को पिरोकर कविताएंँ तैयार की गई हैं और अब ये काव्य- संग्रह के रूप में प्रकाशित हुई हैं। इस काव्य संग्रह में विविध विषयों पर कविताएंँ लिखी गई हैं लेकिन अधिकांशत: कविताएंँ श्रृंगार-रस की हैं। उत्साहवर्धक और हास्य पर भी इनकी लेखनी चली है। बेटियों पर लिखी हुई कविताओं में से जब इन्होंने "बेटी का घर पर आना" कविता सबको सुनाई तो सबकी आँखें भर आईं। संजय सेठ ने पुष्पा सहाय को इस संग्रह के लिए बधाई और शुभकामनाएंँ दी।
डॉ सुरिंदर कौर नीलम ने इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि पुष्पा सहाय भावों की कवयित्री हैं। सारिका भूषण ने किताब पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इनकी कविताएँ सीधे आत्मा को स्पर्श करती है। इस कार्यक्रम में शहर के जाने-माने कवि-कवयित्रियाँ शामिल हुए। परिवार के सदस्य और उनके मित्रों ने भी इस कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें बधाई और शुभकामनाएंँ दी।
सचिन शर्मा ने उनके लिखे हुए गीत को अपना स्वर दिया । सोनल थेपड़ा ने इस किताब की कविता का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनी शर्मा चंदा ने किया। पुष्पा सहाय ने बताया की इस किताब के प्रकाशन और लोकार्पण में उनके पति और बच्चों ने काफी सहयोग किया है। पुष्पा सहाय 'गिन्नी' अब तक कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं और इनकी कविताएंँ पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है।
इस अवसर पर राजीव सहाय, सीमा सहाय, आशमा निलय, डॉ रजनी चंद्र शर्मा, रंगोली सिन्हा, निर्मला कुमारी, राजलक्ष्मी, संजय अखौरी, अमरेश श्रीवास्तव, खुशबू बरनवाल उपस्थित थे।
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