सँवर उठी है दशों दिशाएँ ,धरती का मन हर्षाया है,
चमक उठे हैं आँगन सारे, हर घर उजियारा छाया है |
शांत नभ,संध्या की बेला,गगन में टिमटिमाते तारे,
सुवासित धरती पर लगे,पंक्तिबद्ध दीपक प्यारे-प्यारे
हर द्वार पर तोरण,अल्पना ,मिठाई और पकवान,
है विश्वास,आएंगे श्री लक्ष्मी जी और गणेश भगवान |
धूप-दीप,कुमकुम,केसर,चंदन और पूजा की थाली,
हर घर गूंजे वेद-मंत्र और आँगन में रंगोली की लाली।
जब दीप जले तो केवल घर नहीं,मन भी रौशन हो जाएँ,
कहे 'स्नेही' त्याग अहम् को,निज घर स्वर्ग-सम बनाएँ ।
आइए !इस दीवाली उम्मीद के,प्रेम के,अपनत्व के दीये जलाएँ,
‘मानव ही दीपक बने’- सन्देश यह सम्पूर्ण विश्व में फैलाएँ |
डॉ. कंचन शर्मा 'स्नेही'
नई दिल्ली

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