‘मेहंदी रच रही सा’ : मरु-कोकिला सीमा मिश्रा की आवाज में लोक-सुरों का उत्सव

स्वर माधुरी मल्टीमीडिया के बैनर तले मेहंदी रच रही सा राजस्थानी मेहंदी गीत यू-ट्यूब सहित देश के प्रतिष्ठित म्यूजिक प्लेटफार्म पर 7 दिसंबर को रिलीज

सर्वेश भट्ट. कला समीक्षक

राजस्थान की रेत, रंग और रस को एक ही सुर में समेट लेने की अद्भुत क्षमता शायद ही किसी और स्वर में मिले जितनी मरु-कोकिला सीमा मिश्रा के गायन में झलकती है। यूट्यूब सहित म्यूजिक के सभी लोकप्रिय प्लेटफार्म पर रविवार 7 दिसंबर को रिलीज हुआ उनका यह नया मेहंदी गीत ‘मेहंदी रच रही सा’ इसी पारंपरिक मिठास का जीवंत प्रमाण है। एक ऐसा गीत जो सुनते ही श्रोता को किसी राजस्थानी आँगन की उजली शाम में पहुँचा देता है, जहाँ दुल्हन के हाथों में मेहंदी सज रही है और पूरे घर में उत्सव की महक घुली है।


गायकी की आत्मीयता और लोक-रस की सहज मिठास


सीमा मिश्रा की आवाज़ की कोमलता और उनकी गायकी की सहजता इस गीत को सिर्फ एक संगीत प्रस्तुति नहीं रहने देती, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बना देती है। उनके स्वर में वह आत्मीयता है जो पीढिय़ों से लोकगीतों की पहचान रही है—एक ऐसी मिठास जो दिल को तुरंत छू लेती है और मन में अपनेपन की सुगंध भर देती है। ढोलक की ताल, हारमोनियम की संगत और सरल लोक-धुनें गीत को पारंपरिक रंगों से सराबोर करती हैं।


गीत-संगीत लोक परंपरा के दिग्गजों की कलम से...


इस एलबम के गीत और संगीत की रचना पद्मश्री सम्मानित अली मोहम्मद और गनी मोहम्मद ने की है। राजस्थानी लोक-संगीत की गहराई, उसकी स्वर-लय और उसकी शास्त्रीय बारीकियों पर इन दोनों दिग्गज कलाकारों की पकड़ पूरे गीत में स्पष्ट रूप से महसूस होती है। उनकी रचना-शैली इस गीत को और भी सुगंधित, संवेगशील और परंपरा-निष्ठ बना देती है।


एल्बम संयोजन में शिव विनायक शर्मा का योगदान


पूरे एल्बम का प्रकाशन शिव विनायक शर्मा, निदेशक — स्वर माधुरी मल्टीमीडिया एलएलपी, के रचनात्मक संयोजन में हुआ है। राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को समकालीन माध्यमों के जरिये नई पीढ़ी तक पहुँचाने में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है।


पूर्व की लोकप्रिय रचनाओं की सफलता


इससे पूर्व भी शिव विनायक शर्मा के संयोजन और सीमा मिश्रा के स्वरों में कई लोकप्रिय लोकरचनाएँ श्रोताओं तक पहुँच चुकी हैं। ‘गणपति गणेश मनाया ए भवानी’, ‘राम धुन’, ‘गोविंद घर आओ’, ‘बीरो भात भरण नै आयो’ और ‘मेहंदी रच रही सा..’ जैसी प्रस्तुतियाँ यूट्यूब सहित विभिन्न संगीत प्लेटफॉर्म पर लोकप्रियता की नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं।

इन रचनाओं में राजस्थान की संस्कृति, श्रद्धा और सादगी उसी गरिमा के साथ खिलकर सामने आती है, जिसके लिए यह धरती जानी जाती है।


इस गीत का विशेष आकर्षण


‘मेहंदी रच रही सा’ इन सभी रचनाओं में इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि इसमें सीमा मिश्रा की गायकी अपने चरम सौंदर्य पर दिखती है। उनका स्वर मानो मेहंदी की गाढ़ी सुगंध की तरह धीरे-धीरे श्रोता के मन में उतरता चला जाता है।


लोक-गायकी का सौंदर्य और सांस्कृतिक जीवंतता


मरु-कोकिला सीमा मिश्रा, रचनाकार अली-गनी मोहम्मद और संयोजक शिव विनायक शर्मा — तीनों का यह सम्मिलित प्रयास फिर एक बार साबित करता है कि राजस्थान का लोकसंगीत सिर्फ सुना नहीं जाता; उसे जिया जाता है, महसूस किया जाता है और हृदय में बसाया जाता है।



गीत के ऑडियो-वीडियो का विवरण

गीत - मेहंदी रच रही सा

गायिका - सीमा मिश्रा 

संगीत निर्देशक - अली- गनी

गीत - अली- गऩी

अरेंजर-अरविन्दर सिंह

रिकॉर्डेड - अरुण वीर सरस्वती स्टूडियो दिल्ली 

डीओपी/एडिटर- जीतूराज प्रजापति 

प्रस्तुति - सीमा मिश्रा/अंशु सैनी

निर्देशन - अक्षत वर्मा

मेकअप - पिंकी वर्मा

कोरियोग्राफर - ज्योति शेखावत

वीडियो प्रोडक्शन - एरिया 51 प्रोडक्शन 

परियोजना प्रमुख - एस पी जोधा

लेबल-स्वर माधुरी 

निर्माता - शिव विनायक शर्मा/सीमा मिश्रा 

कॉपीराइट - स्वर माधुरी मल्टीमीडिया एलएलपी 

रिलीज डेट - 7  दिसंबर 2025

प्रकाशक - हूपो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड


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