मांड की परंपरा से उपजा गीत : पद्मश्री उस्ताद अली गनी की सुर-रचना
लोकदृष्टि को साकार करती कला-परिकल्पना : शिव विनायक शर्मा
सर्वेश भट्ट. कला समीक्षक
मेहंदी गीत में रची-बसी लोकचेतना
यह गीत केवल एक मेहंदी गीत नहीं, बल्कि राजस्थान की लोकचेतना, पारिवारिक रिश्तों और विवाह संस्कारों की आत्मा को स्वर देता है। माँ की ममता, भाई से बिछड़ने की पीड़ा, बहन की शरारत, सखियों की हँसी और नए जीवन के सपनों की सौंधी खुशबू—इन सभी भावनाओं का सुंदर संगम इस गीत में देखने-सुनने को मिलता है।
पद्मश्री अली-ग़नी की गरिमामयी जुगलबंदी
इस प्रस्तुति को विशेष ऊँचाई प्रदान करता है पद्मश्री से सम्मानित मांड संगीत के दिग्गज उस्ताद अली मोहम्मद और उस्ताद गनी मोहम्मद का गीत-संगीत। मांड की ठहरी हुई, आत्मा में उतर जाने वाली धुनों के साथ रचा गया यह गीत राजस्थानी लोक-संगीत की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसमें संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि स्मृति और संस्कार का संवाहक होता है।
सीमा मिश्रा की आवाज़ में लोक का सौंदर्य
सीमा मिश्रा की आवाज़ में यह गीत मेहंदी, विवाह और पारंपरिक आयोजनों के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त बन पड़ा है। उनकी गायकी में लोक की सादगी, भाव की गहराई और परंपरा की गरिमा एक साथ मुखर होती है, जो श्रोता को सीधे राजस्थान की सांस्कृतिक भूमि से जोड़ देती है।
दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति में परंपरा की झलक
वीडियो की प्रस्तुति भी गीत की आत्मा के अनुरूप है। पारंपरिक परिधानों, लोकनृत्य की लय और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी यह रचना दृश्य और श्रव्य—दोनों स्तरों पर प्रभाव छोड़ती है। फिल्मांकन, कोरियोग्राफी और लोकेशन मिलकर इसे एक सजीव लोकानुभव में बदल देते हैं।
स्वर माधुरी मल्टीमीडिया की निरंतर लोकयात्रा
स्वर माधुरी मल्टीमीडिया के बैनर तले प्रस्तुत यह गीत 2026 की पहली पेशकश के रूप में सामने आया है, जिसे कला-संयोजन और लोक-संवेदनाओं के प्रति सजगता के लिए जाना जाता है। निर्माता शिव विनायक शर्मा और सीमा मिश्रा की यह नई प्रस्तुति राजस्थानी लोक-संगीत की सतत यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
लोकगौरव का उत्सव
‘बन्नो’ न सिर्फ़ एक नया गीत है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान, विवाह परंपराओं और लोकगौरव का उत्सव है—जो सुनने वालों के मन में लंबे समय तक अपनी मिठास बनाए रखता है।
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