'पीव लड़ै सीमा पर कागा, कह दीजे संदेस रे’ हुआ रिलीज़
प्रेम, प्रतीक्षा, त्याग और राष्ट्रभावना का भावपूर्ण संगम
सर्वेश भट्ट. कला समीक्षक, मुंबई
राजस्थानी लोकगीत-संगीत के संरक्षण, संवर्धन और सृजन के लिए निरंतर सक्रिय स्वर माधुरी मल्टीमीडिया ने अपनी एल्बम श्रृंखला की 12वीं प्रस्तुति के रूप में एक भावपूर्ण देशभक्ति लोकगीत जारी किया है। मरु कोकिला सीमा मिश्रा की सुमधुर आवाज़ में प्रस्तुत गीत “पीव लड़ै सीमा पर कागा, कह दीजे संदेस रे” प्रेम, विरह, त्याग, प्रतीक्षा और देशभक्ति का अद्वितीय संगम बनकर सामने आया है।
राजस्थानी लोक संस्कृति अपनी सरलता और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान के प्रख्यात गीतकार एवं संगीतकार स्वर्गीय निर्मल मिश्रा की रचना यह गीत केवल एक व्यक्तिगत विरह कथा नहीं, बल्कि उन असंख्य परिवारों की प्रतिनिधि आवाज़ है, जिनके अपने देश की सीमाओं पर तैनात रहकर राष्ट्ररक्षा का दायित्व निभाते हैं।
विरह से शुरू होकर राष्ट्रभावना तक पहुंचता गीत
गीत की मूल भावना विरह से आरंभ होती है। “पीव” अर्थात प्रियतम या पति, जो सीमा पर देश की रक्षा कर रहा है, उससे दूर रहकर नायिका गहरे अकेलेपन और पीड़ा का अनुभव करती है। उसके मन में प्रिय की स्मृतियां, सुरक्षा की चिंता और पुनर्मिलन की प्रतीक्षा निरंतर चलती रहती है।
सीमा मिश्रा की आवाज़ इस भावभूमि को अत्यंत सहज और मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त करती है। उनके स्वर में विरह की नमी भी है और भीतर छिपा धैर्य भी, जो गीत को सीधे श्रोता के हृदय तक पहुँचा देता है।
देशभक्ति का सशक्त स्वर
इस गीत की विशेषता यह है कि यह केवल विरह का गीत बनकर नहीं रह जाता I नायिका अपने प्रिय के कर्तव्य को समझती है और उस पर गर्व करती है। वह जानती है कि उसका पति केवल उसका जीवनसाथी नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का प्रहरी है। इसलिए वह उसे वापस बुलाने की नहीं, बल्कि उसकी कुशलता और विजय की कामना करती है।
यही प्रेम स्वार्थ से ऊपर उठकर त्याग, समर्पण और राष्ट्रधर्म का रूप ले लेता है। गीत राजस्थानी संस्कृति की उस गौरवशाली परंपरा को सामने लाता है, जहां व्यक्तिगत सुख से अधिक महत्व कर्तव्य और मातृभूमि को दिया जाता है।
‘कागा’ बना भावनाओं का संदेशवाहक
गीत में “कागा” यानी कौए का प्रयोग अत्यंत सुंदर प्रतीक के रूप में किया गया है। भारतीय लोकपरंपरा में कौए को संदेशवाहक माना गया है। जब नायिका अपने मन की बात सीधे नहीं कह पाती, तो वह कौए से अपने प्रिय तक संदेश पहुंचाने की विनती करती है। यह प्रसंग गीत को और अधिक भावपूर्ण बना देता है। यहां कागा केवल पक्षी नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और प्रेम का वाहक बन जाता है।
सैनिक परिवारों के त्याग को समर्पित प्रस्तुति
“पीव लड़ै सीमा पर…” सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के मौन त्याग को भी रेखांकित करता है। जब कोई सैनिक सीमा पर तैनात होता है, तो उसके पीछे पूरा परिवार धैर्य, प्रतीक्षा और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। गीत इसी अनदेखे त्याग को संवेदनशीलता से सामने लाता है।
यह बताता है कि देशभक्ति केवल रणभूमि तक सीमित नहीं, बल्कि उन घरों में भी जीवित रहती है, जहां प्रियजनों की अनुपस्थिति के बावजूद गर्व और धैर्य कायम रहता है।
लोकभाषा की सरलता, भावों की गहराई
भाषा की दृष्टि से गीत अत्यंत सरल, सहज और लोकजीवन के निकट है। यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। बिना किसी जटिलता के गीत अपने भाव सीधे श्रोता के मन तक पहुंचा देता है।
सीमा मिश्रा की कोकिल कंठी आवाज़ और स्वर्गीय निर्मल मिश्रा की रचना मिलकर इस गीत को एक कालातीत लोक-अनुभूति में बदल देती है।
ऐसे सुना जा सकता है गीत
स्वर माधुरी मल्टीमीडिया चैनल के प्रमुख शिव विनायक शर्मा ने बताया की सीमा मिश्रा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कर श्रोता इस सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं। “पीव लड़ै सीमा पर कागा, कह दीजे संदेस रे” केवल एक गीत नहीं, बल्कि प्रेम, विरह, प्रतीक्षा, त्याग और देशभक्ति की अमर लोकगाथा है जो श्रोता को भावनाओं के उस संसार में ले जाती है, जहां निजी प्रेम और राष्ट्रप्रेम एकाकार हो जाते हैं।
गीत – पीव लड़े सीमा पर, कागा कह दीजे संदेश रेगायिका – सीमा मिश्रागीतकार – निर्मल मिश्रासंगीत निर्देशक – निर्मल मिश्राअरेंजर – अरविंदर सिंहरिकॉर्डिंग – अरुण वीर सरस्वती स्टूडियो, दिल्लीमुख्य कलाकार – सीमा मिश्रा / रूप कंवर / लकी शेखावतनिर्देशक – जीतूराज प्रजापतिपटकथा / संकल्पना – माइकल वशिष्ठडीओपी / सीसी / संपादन – जीतूराज प्रजापतिमेकअप – राकेश सैनीप्रोडक्शन मैनेजमेंट – हिमांशु खंडेलवाल / माइकल वशिष्ठवीडियो प्रोडक्शन – एरिया 51 प्रोडक्शननिर्माता – शिव विनायक शर्मा / सीमा मिश्रालेबल – स्वर माधुरीकॉपीराइट – स्वर माधुरी मल्टीमीडिया एलएलपीसह-प्रकाशक – हूपो मीडिया प्राइवेट लिमिटेडरिलीज़ तिथि – 3 मई 2026
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