कुछ लिखे तुमपर आज बड़ी बेकरारी है
मगर क्या लिखे कि ये कोशिश अभी जारी है
क्या लिख दे वो नज़र जो पहली बार हमपर पड़ी थी
या लिखे वो मुलाकात जो सब रस्मों से बड़ी थी।
हम तुमपर क्यों ना एक खाताबही लिख दे
कि मुस्कुराहट का हर हिसाब और लाभ हानि लिख दे।
हम तुम्हें पिरोते जाए शब्दों में और कविता लिख दें
क्यों ना ये रोज़ अपने ख़यालो में तुम्हारी आवाजाही लिख दे।
हम सूनी रात और व्यस्त दिनों में आपकी याद लिख दे
क्यों ना इन मशरूफ़ चाँद तारों से हमारी दास्तान लिख दे।
हम हर दिन के हर एहसास की कहानी लिख दे
क्यों ना राधा का प्रेम और मीरा की याद बेगानी लिख दे।
हम मन्ज़र ये दूर रहने के और पास आने के बहाने लिख दे
हम अपने दिल की धड़कन और सांसो की कहानी लिख दे।
क्या लिख दे हम वो साथ होने की दुआएँ सारी
क्यों ना चाँद तारों तले हम रात रूमानी लिख दे।
कोई देखे ना हमारी तरह तुम्हें कभी
क्यों ना हम नाम तुम्हारे अपनी ज़िंदगानी लिख दे।
हम समुन्दर से गहरा और आसमान सा अनन्त
क्यों ना प्यार से तुम्हारे प्यार पर हक़ अपना लिख दे।
हम लिख लिख कर तुम्हें इतना लिख दे
की जो मिला नहीं तुमसे कभी वो भी हमारी कहानी लिख दे।
शिल्पा वैष्णव
जोधपुर, राजस्थान
إرسال تعليق