मुझे भी पढ़ने दो..

 मुझे भी पढ़ने दो..

किताबो को

गले से लगाऊंगी

आखर को

संगित बनाऊंगी

कोई न रोको, न टोको

मुझे भी पढ़ने दो

मुझे भी पढ़ने दो

चांद की खूटी में ,

बस्ता टगाऊंगी

अपनी चोटी से

पतंग उड़ाऊंगी

कोई न रोको, न टोको

मुझे भी पढ़ने दो

मुझे भी पढ़ने दो

माँ देख तेरे जैसी

भी बन जाऊँगी

कलेक्टर फिर भी

 मै कहलाऊँगी

कोई न रोको, न टोको

मुझे भी पढ़ने दो

मुझे भी पढ़ने दो..


अनामिका चक्रवर्ती 

मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़

Post a Comment

और नया पुराने