हालात"

 हालात"

कराह रही है धरती

नि शब्द आसमान है।

प्रकृति के जुल्म से

बेबस हर इंसान है।

हर तरफ है चीख पुकार

सिसकते लोगों की दरकार।

जिसके दर पे होती थी फरियाद

तालों में बंद वो भगवान है।

चिंतन है जरूरी अब

मनन भी ज़रूरी है।

क्यों ऐसी हालत हुई ?

किन कर्मों की सजा मिली है।

छूटी हाथ से अब कमान है।

रुकेगी कहां जाकर

ये रोग की सुनामी।

बस इलाज और दवा

ढूंढ रहे सभी

जा रही कितनी निर्दोष जान हैं।

आओ मिलकर याद करें

प्रार्थना और फरियाद करें

बस करो हे नाथ अब

मचा दिया त्राहि माम है।

कराह रही है धरती.......



अर्चना त्यागी

जोधपुर, राजस्थान

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