"कर्मफल"

 "कर्मफल"

" कर्मन्ये वा धी कारस्ते मां फलेसु कदाचन।"

गीता का अत्यंत प्रभावी श्लोक। अब समय आ गया है कि इसे आत्मसात कर लिया जाए।

कर्म करना ही हमारा अधिकार है, फल पर हमारा अधिकार नहीं है। अर्थात फल देना किसी दूसरी शक्ति के आधीन है। हमारी लगन, मेंहनत और उसके गणित के अनुसार  हमें हमारे कर्मों का फल मिलता है। जो सृष्टि का निर्माण करने वाला है उसने यह कार्य अपने ही ऊपर रखा है। कोरोना ने इसे फिर से सिद्ध किया है। पिछले साल आकर बुजुर्गों को अपना शिकार बनाया और अब फिर वापिस लौट आया है नई पीढ़ी से हाथ मिलाने। सभी प्रयत्न करके भी हम बेबस हैं। समस्त योजनाएं असफल हो गई हैं। जीवन एकदम नीरस और उबाऊ हो गया है। घर के बाहर, घर के अंदर हर तरफ बस कोरोना के ही चर्चे हैं। अखबार खोलो तो करोना, टीवी चलाओ तो करोना। भगवान का नाम भी इतनी बार नहीं लिया जा रहा है जितनी बार कोरोना कहा जा रहा है। हम जिसको पुकारते हैं वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप में हमारे पास ही रहता है। शायद यही कारण है कि कोरोना जाते जाते फिर से वापिस लौट आया है। 

अब आवश्यकता है कोरोना को दिल और दिमाग से रुखसत करने की। और सभी जानते हैं यह काम इतना भी आसान नहीं है। लेकिन कोरोना को भगाना है तो करना ही पड़ेगा। जिन्हे कोरोना कष्ट दे चुका है अथवा अभी चपेट में ले रखा है सभी के लिए आवश्यक है सकारात्मक बने रहना। अपनी मानसिक ऊर्जा को कोरोना पर बिल्कुल खर्च नहीं करना। कोरोना के डर को हावी नहीं होने देना।

इस प्रयोग को करने के लिए आपको उन सभी कार्यों के विषय में सोचना है जो इस दौरान आपने पूरे किए हैं। सभी रिश्तेदारों से बातचीत, जिसके लिए समय ही नहीं होता था। अपनी रुचि के कार्य जो सालों पहले करने छोड़ दिए थे। कुछ लोग अपने पैतृक घर भी वापिस लौटे हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वहीं लौट आना होगा जहां से चले थे। उस घर का महत्व कोरोना ने बता दिया है कि जब दुनिया में कहीं जगह नहीं मिले तो वही घर, वही गांव बाहें पसारे स्वागत करता है। प्रदूषण स्तर न्यूनतम रहा है। जिसने आदत डाल दी कि बिना वाहन भी कुछ समय बिताया जा सकता है।

जो लोग कोरोना के कारण अपने प्रियजनों को खो चुके हैं वो यही सोचें कि जीवन में भीषण दुःख आकर जा चुका है और अब सुख की ही बारी है। बाहर हालात कैसे भी हों हमें अपने मन और मस्तिष्क को दुरुस्त रखना है तभी इस वैश्विक संकट से निजात पा सकते हैं।


अर्चना त्यागी 

जोधपुर, राजस्थान


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