नवीनतम ऊर्जा, पारंपरिक ऊर्जा का विकल्प नहीं https://ift.tt/3lwr6jq

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जयपुर. राजस्थान ने जब नवीनतम ऊर्जा क्षेत्र में गुजरात और तमिलनाडु के बाद सबसे बड़ी क्षमता स्थापित कर अपनी खास पहचान बनाई है, तब यह जरूरी है की सरकार कोयला आधारित इकाइयों को भी चलाए। नवीनतम ऊर्जा समय की मांग है पर पारंपरिक ऊर्जा का वह विकल्प नहीं बन सकती। राजस्थान और अन्य कई राज्यों ने कोयले की किल्लत के चलते बिजली मांग पूरी करने में असमर्थत्ता जाहिर कर बिजली कटौती की। जब त्योहारों का मौसम चल रहा है और घंटो तक की बिजली कटौती की जा रही है। राजस्थान में प्रतिदिन बिजली की औसत मांग 12500 मेगावाट है पर बिजली की उपलब्धत्ता सिर्फ 8500 मेगावाट ही है। इसके चलते राजस्थान एनर्जी एक्सचेंज को 10 रुपए प्रति यूनिट से 15 रुपये प्रति यूनिट तक चूका कर बिजली खरीद रहा है और उसका सीधा बोज ग्राहकों पर डाल रहा है। राज्य सरकार को जल्द से जल्द लम्बे समय से चल रहे कोयले के भुगतान के मुद्दे सुलझा देने चाहिए ताकि राज्य के उद्योग, व्यापर और स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से चल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में बिजली की मांग को पूरी करने के लिए करीब 4000 मेगावाट की कमी है जिसके लिए उससे कई गुना ज्यादा नवीनतम ऊर्जा के संयंत्र लगाने पडेंगे।



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