कॉकलियर इम्प्लांट ने बदली प्रदेश के 1,111 बच्चों की जिंदगी, बोलने और सुनने में बनाया सक्ष्म

जयपुर
प्रदेश बजट के दौरान कॉकलियर इम्प्लांट को चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल कर सरकार ने जन्मजात दिव्यांगों को बड़ी सौगात दी हैं। हालांकि राजस्थान में अब तक 1111 बच्चों का कॉकलियर इम्प्लांट कर चिकित्सक उनकी जिंदगी बदल कर उन्हें बोलने और सुनने के सक्ष्म बना चुके हैं। लेकिन कॉकलियर इम्प्लांट करवाने का खर्चा महंगा होने से प्रदेश के बहुत से ऐसे दिव्यांग अभी भी इलाज लेने में सक्ष्म नहीं है। लेकिन 25 फरवरी को मनाए जाने वाले कॉकलियर इम्प्लांट दिवस से पहले सरकार ने इसे चिरंजीवी योजना में शामिल कर अब तक इलाज से वंचित दिव्यांगों में एक नई उम्मीद जगा दी है।
800 को मिला मुफ्त इलाज
राजस्थान सन् 2011 में आंध्र प्रदेश के बाद दूसरा राज्य बना जब यहां मुख्यमंत्री सहायता कोष से कॉकलियर इम्प्लांट किया जाने लगा। जब से लेकर अब तक प्रदेश के सात सरकारी अस्पतालों में कुल 1111 इम्पलांट हो चुके है। लेकिन इनमें से 800 से अधिक को एकदम मुफ्त इलाज मिला। मुख्यमंत्री सहायता कोष में आवेदन करने से मिलने वाली राशि से हुए इम्पलांट ने इनकी बच्चों की जिंदगी बदल दी । क्योकि इलाज का खर्चा महंगा होने से हर कोई इलाज करवाने में सक्ष्म नहीं है। यहीं कारण है कि केवल तीन सौ बच्चों का इम्पलांट का खर्चा ही उनके परिजन वहन कर पाए। एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के प्रोफसर डॉ. मोहनीश ग्रोवर के अनुसार सरकारी अस्पताल में एक इम्पलांट का खर्चा करीब 4 लाख 60 हजार रुपए तक आता है और निजी अस्पताल में इलाज ले तो करीब 8 लाख रुपए तक खर्चा आता है। इसके बाद भी हर साल मशीनों के एसेसरीज का खर्चा आता है। जो भी महंगा होता है। मुख्यमंत्री सहायता कोष से इलाज करवाने वालों का सालाना एसेसरीज का खर्चा भी मिलता हैं। जिसमें 75 प्रतिशत तक खर्चा लाभार्थी के 18 साल तक होने तक सरकार वहन करती है।

चिरंजीवी योजना में शामिल होने से मिलेगा लाभ
देश में हर एक हजार की संख्या में से 4 बच्चें ऐसे पैदा होते है जो जन्मजात ही बोलने और सुनने में असक्ष्म होते है। छह साल तक की उम्र तक कॉकलियर इम्प्लांट कर उन्हें फिर से बोलने और सुनने के सक्ष्म बनाया जाता है। बीपीएल/नॉन बीपीएल परिवार जिनकी वार्षिक आय 2 लाख रुपए तक है, उन्हें तो मुख्यमंत्री सहायता कोष से इलाज के लिए पूरी सहायता मिल जाती है। लेकिन मध्यमवर्गीय इलाज लेने में सक्ष्म नहीं था। लेकिन 25 फरवरी को मनाए जाने वाले इंटरनेशनल कॉकलियर इम्प्लांट दिवस से पहले इसे चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल करने से सरकारी के साथ अब निजी अस्पताल में भी दिव्यांग अपना इलाज करवा सकेंगे। क्योकि दिव्यांग को दस लाख रुपए तक की सहायता मिल सकेगी। कॉकलियर इम्प्लांट के नोडल अधिकारी डॉ.मोहनीश ग्रोवर ने कहा कि जयपुर में एसएमएस,जयपुरिया,बीकानेर,जोधपुर,अजमेर,कोटा और उदयपुर में अभी कॉकलियर इम्प्लांट की सुविधा है लेकिन अन्य जिलों में भी अब चिरंजीवी योजना से दिव्यांग लाभ ले सकेंगे और फिर से बोलने व सुनने के लायक बन सकेंगे।



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