जयपुर. जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की ओर से बीकानेर के सांस्कृतिक संगठन— लोकायन और राजस्थान कबीर यात्रा के सहयोग से 26 व 27 फरवरी को दो दिवसीय 'संग कबीर म्यूजिक फेस्टिवल' की मेजबानी की जाएगी। इस फेस्टिवल के जरिए 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि व संत कबीर दास की शिक्षाओं व परंपराओं का जश्न मनाया जाएगा। जेकेके के ओपन थियेटर में शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक यह फेस्टिवल प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा संगीत प्रस्तुतियों व सत्रों की श्रृंखला के जरिए कबीर व उनकी मिश्रित संस्कृति की खोज करेगा।
भक्ति कवियों की गायन शैली को करेंगे प्रस्तुत
26 फरवरी को उद्घाटन समारोह में कालूरामजी बामनिया एंड ग्रुप की प्रस्तुति होगी। वे मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में कबीर, गोरखनाथ, बनानाथ और मीरा जैसे भक्ति कवियों के गायन की जीवंत परंपरा से ताल्लुक रखते हैं। इसके बाद राजस्थान के पुगल के मीर बसु व उनकी मंडली द्वारा 'मेलोडीज ऑफ द थार' का आयोजन किया जाएगा। पश्चिम बंगाल के कलाकारों की युवा पीढ़ी मुर्शिदाबादी प्रोजेक्ट की प्रस्तुति 'साउंड्स ऑफ द सूफीज' के साथ प्रथम दिन की गतिविधियों का समापन होगा। इसमें सितार पर श्वेतकेतु बनर्जी और वोकल्स पर सौम्यदीप मुर्शिदाबादी साथ देंगे। इस दौरान कलाकार अमित कल्ला का आर्ट सैशन 'रंगरेज' आयोजित किया जाएगा।
हिमांशु और वेदांत की जोड़ी
27 फरवरी को दखनऊ के हिमांशु बाजपेयी व चेन्नई के वेदांत भारद्वाज की जोड़ी संगीतमय दास्तानगोई- 'कबीर की दास्तान' को पेश करेंगे। संत कबीर के दोहों से बने गीतों के प्रदर्शन के लिए पहचाने जाने वाले नीरज आर्य के कबीर कैफे (मुंबई का लोक फ्यूजन बैंड) की रोमांचक प्रस्तुति के साथ फेस्टिवल का समापन होगा। इस दौरान दर्शन सिंह का सैशन 'एक्सप्लोरिंग स्पीच एंड साउंड' भी आयोजित किया जाएगा।
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