जयपुर.
ईआरसीपी प्रोजेक्ट को लेकर केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और जलदाय मंत्री महेश जोशी के बीच बयानबाजी के चलते सियासी बवंडर का कारण बनी जल जीवन मिशन की एक दिवसीय कार्यशाला ने कुप्रबंधन के चलते 50 लाख रुपए के मोटे खर्च के बाद भी राज्य सरकार की जमकर किरकिरी करवा दी।
गत 8 अप्रेल को हुई इस कार्यशाला में आमंत्रित किए गए 11 राज्यों के जलदाय मंत्रियों और अफसरों को ठहराने के लिए राजधानी के दो अलग-अलग निजी होटल में 50 से ज्यादा कमरे बुक किए गए थे। कार्यशाला आयोजन के लिए जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार की ओर से दिए गए बजट में से सपोर्ट एक्टिविटीज पर खर्च करने की अनुमति मिली थी। कार्यशाला की व्यवस्थाओं के लिए जलदाय मंत्री के पास इंजीनियरों की फौज होने के बाद भी लाखों रुपए में इवेंट कंपनी को व्यवस्थाओं का जिम्मा दे दिया गया। इसके बाद भी आयोजन कुप्रबंधन का शिकार हो गया।
तुरंत चुकाया किराया तब छोड़ने दिया होटल
कार्यशाला समाप्त होने अगले दिन जब दूसरे राज्यों के मंत्री वापस जाने के लिए होटल छोड़ने लगे तो होटल प्रबंधन ने बिना किराया चुकाए होटल नहीं छोड़ने दिया। मामले की जानकारी जब मंत्री जोशी के करीबी इंजीनियर और कार्यशाला का आयोजन करने वाले जल स्वच्छता संगठन के अफसरों को मिली तो आनन-फानन में होटल प्रबंधन को इवेंट कंपनी के प्रतिनिधियों ने किराए के भुगतान का चेक दिया। तब जाकर अन्य राज्यों से आए मंत्री होटल छोड़ सके।
खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल
दूसरे होटल में ठहराए गए अन्य राज्यों से आए अफसरों ने इंजीनियरों से खाने की गुणवत्ता बेहद ही घटिया होने की शिकायत की। कई अधिकारियों ने तो दूसरे होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाया। लेकिन इंजीनियर इस पूरे मामले को दबा गए।
पर्दे के पीछे खेल में मंत्री का करीबी इंजीनियर शामिलसूत्रों के अनुसार कार्यशाला के लिए कौनसा होटल बुक होगा, कितने सुइट बुक होंगे, किस इवेंट कंपनी को लेना है, किस अधिकारी को टीम में शामिल करना है, यह पूरा खेल पर्दे के पीछे मंत्री जोशी के करीबी इंजीनियर के हाथों में था। मंत्री जोशी इस इंजीनियर को अब जयपुर शहर जलदाय विभाग की कमान देने की तैयारी कर रहे हैं।
मोटे खर्च पर उठे सवाल
- दूसरे राज्यों से आए मंत्रियों और अफसरों को खासा कोठी या फिर आरटीडीसी के होटलों में ठहराया जा सकता था- कार्यशाला के लिए इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान या दुर्गापुरा कृषि प्रबंध संस्थान का ऑडिटोरियम ले सकते थे
- व्यवस्थाओं के लिए इंजीनियरों की फौज थी तो लाखों रुपए में इवेंट कंपनी को जिम्मा क्यों दिया गया-
जल एवं स्वच्छता संगठन के निदेशक हुकमचंद वर्मा के पास भुगतान के अधिकार ही नहीं तो फिर उन्होंने कार्यशाला के लिए चेक कैसे काटे
- पैसा भले ही केन्द्र सरकार का था लेकिन इस फिजूलखर्ची की अनुमति जलदाय मंत्री महेश जोशी ने क्यों दी
यह रहे जिम्मेदार
- जलदाय मंत्री महेश जोशी
- हुकम चंद वर्मा- निदेशक जल एवं स्वच्छता संगठन
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