नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण दुनिया ही नहीं देश का नौकरी बाजार भी बदल रहा है। एआई में मानवीय कौशल वाली विभिन्न भूमिकाओं के लिए पिछले महीने करीब 45,000 नई नौकरियां निकली हैं। इनमें डेटा वैज्ञानिक और मशीन लर्निंग (एमएल) इंजीनियर का कॅरियर सबसे आगे रहा। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की जीडीपी में एआई की वजह से 2025 तक करीब 500 अरब डॉलर जुड़ने की उम्मीद है। वर्ष 2035 तक जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 967 अरब डॉलर होगी।
मानव संसाधन कंपनी टीमलीज (Teamlease) की 'इनिशिएटिव फॉर क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (आइसीईटी) - फोर्सेस शेपिंग फ्यूचर ऑफ टेक्नोलॉजी' रिपोर्ट के अनुसार, एमएल एप्लिकेशन पर केंद्रित स्क्रिप्टिंग के लिए कुशल एआई पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई में विशेषज्ञता रखने वाले नए इंजीनियर सालाना 10 लाख से 14 लाख रुपए के बीच शुरुआती वेतन (सालाना) की उम्मीद कर सकते हैं। एआई के कारण बदलते नौकरी बाजार में कुशल पेशेवरों की तत्काल आवश्यकता है जो अत्याधुनिक एआई तकनीकों को डिजाइन करने, उसे विकसित और कार्यान्वित करने की योग्यता रखते हैं।
फैक्ट फाइल
- 136 अरब डॉलर रहा 2022 में एआई का अनुमानित वैश्विक बाजार
- 37 फीसदी वैश्विक बाजार बढ़ने की उम्मीद है 2023 से 2030 तक
- 12.3 अरब डॉलर भारत में राजस्व प्राप्त हुआ एआई के कारण 2022 में
- 18 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है एआई सॉफ्टवेयर सेक्टर 2025 तक
- 77.5 अरब डॉलर रेकॉर्ड वैश्विक निवेश हुआ एआई सेक्टर में 2021 में
- 36 अरब डॉलर वैश्विक निवेश हुआ था एआई सेक्टर में 2020 में
- 1.5 फीसदी भारत की हिस्सेदारी रही वैश्विक निवेश में 2022 में
- 15.7 खरब (ट्रिलियन) डॉलर की हिस्सेदारी का अनुमान है विश्व अर्थव्यवस्था में 2030 तक
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/Ee923Mf
https://ift.tt/Qth78rU
إرسال تعليق