फर्जी ईपीआर क्रेडिट से करोड़ों की अवैध कमाई
अहमदाबाद. पर्यावरण एवं कस्टम्स कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ निदेशालय राजस्व खुफिया (DRI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एम/एस ओएस्टर इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अंकित सुभाष मित्तल को प्रतिबंधित टायर स्क्रैप की तस्करी और फर्जी ईपीआर (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) क्रेडिट के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस मामले में करीब ₹49 करोड़ के कस्टम्स उल्लंघन का अनुमान लगाया गया है।
डीआरआई अधिकारियों के अनुसार आरोपी को 5 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 6 दिसंबर 2025 को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां डीआरआई द्वारा मांगी गई कस्टडी को अदालत ने खारिज कर दिया और आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
67 हजार मीट्रिक टन प्रतिबंधित टायर स्क्रैप का आयात
जांच में सामने आया है कि ओएस्टर इंडस्ट्रीज़ ने लगभग 67,000 मीट्रिक टन प्रतिबंधित टायर स्क्रैप का आयात किया। यह मात्रा स्पेशल इम्पोर्ट लाइसेंस (SIL) के तहत अनुमत सीमा से कई गुना अधिक थी। आरोप है कि कंपनी ने SIL लाइसेंस की ओवर-डेबिटिंग की और “एक्चुअल यूजर कंडीशन” का उल्लंघन करते हुए आयातित स्क्रैप को स्वयं उपयोग में लेने के बजाय तीसरे पक्ष को बेच दिया।
डीआरआई का कहना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से किया गया कस्टम्स कानून का उल्लंघन है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
फर्जी ईपीआर क्रेडिट से पर्यावरण नियमों की भी अनदेखी
कस्टम्स उल्लंघन के साथ-साथ कंपनी पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर आरोप है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि ओएस्टर इंडस्ट्रीज़ ने टायर स्क्रैप को रीसायकल करने का झूठा दावा करते हुए फर्जी ईपीआर प्रमाणपत्र तैयार किए। इन प्रमाणपत्रों को विभिन्न टायर निर्माताओं को बेचकर कंपनी ने करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया।
अधिकारियों ने इस पूरे मामले को “दोहरी धोखाधड़ी” बताया है, जिसमें तस्करी के साथ-साथ पर्यावरण अनुपालन के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया।
निदेशक मंडल और अन्य कंपनियां जांच के दायरे में
ओएस्टर इंडस्ट्रीज़ प्रा. लि. के निदेशकों में अंकित सुभाष मित्तल, पुखराज अग्रवाल और अनिल राठी शामिल हैं। जांच एजेंसी पुखराज अग्रवाल से जुड़ी ओएस्टर इंडस्ट्रीज़, श्री वासुदेव प्रोसेसर्स प्रा. लि., तंतिथैया इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रा. लि. और श्री वासुदेव वेंचर्स एलएलपी सहित अन्य कंपनियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
इसी तरह अनिल राठी से जुड़ी सोलेक्स एनर्जी लिमिटेड, सोनाली डाइंग एंड प्रिंटिंग प्रा. लि., पळसाना एनवायरों प्रोटेक्शन लि., पांडेसेरा इंफ्रास्ट्रक्चर लि. और ओमकारचंद राठी एंड सन्स एलएलपी भी जांच के घेरे में हैं।
व्हाइट रॉक इंडस्ट्रीज़ एलएलपी से करीबी संबंध
डीआरआई ने व्हाइट रॉक इंडस्ट्रीज़ एलएलपी के साथ ओएस्टर इंडस्ट्रीज़ के करीबी व्यावसायिक संबंधों की भी जांच शुरू कर दी है। यह एलएलपी 9 जनवरी 2020 को स्थापित हुई थी और इसके ई-मेल आईडी के जरिए दोनों संस्थाओं के बीच व्यावसायिक लेनदेन के संकेत मिले हैं।
डीआरआई अधिकारियों का कहना है कि मामले में वित्तीय लेनदेन, कॉरपोरेट ढांचे और अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान अतिरिक्त गिरफ्तारियों से भी इनकार नहीं किया गया है।
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