राजस्थान इम्पेक्ट एंड फेम अवार्ड (रीफा),राजस्थानी कला एवं संस्कृति को समर्पित भव्य सम्मान एवं सांस्कृतिक समारोह संपन्न


मरु कोकिला सीमा मिश्रा को रीफा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से अलंकृत किया गया

जिन कलाकारों और सृजनकर्ताओं का हम सम्मान कर रहे हैं, वे केवल व्यक्ति नहीं हैं-वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक हैं: श्रीलेखा शर्मा

जयपुर, शुक्रवार, 26 दिसंबर।

राजस्थान की कला-संस्कृति को मिला मंच जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित शांति बाग में रीफा ( राजस्थान इम्पेक्ट और फेम अवार्ड का भव्य आयोजन 21 दिसंबर रविवार को किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मान समारोह का मुख्य उद्देश्य राजस्थान की कला, संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करना रहा।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीलेखा शर्मा (जॉइंट कमिश्नर, स्टेट टैक्स, राजस्थान,अति विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अली मोहम्मद,पद्मश्री गनी मोहम्मद थे। समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं मोटिवेशनल स्पीकर शिव विनायक शर्मा, श्वेता सिंह, एस.बी. सिंह, हरिराम रिणवा, विक्रम सिंह,तनिष्का सोनी, गौरव धादिच, कपिल जांगिड़, दीपेन्द्र सिंह, मुकेश सैनी, अशोक सैनी की गरिमामय उपस्थित रही।समारोह का विधिवत उद्घाटन सम्मानित अतिथियों द्वारा दीपप्रज्वलित कर किया गया।


इस भव्य सम्मान एवं सांस्कृतिक समारोह में भारत की लोक संगीत साम्राज्ञी, प्रख्यात राजस्थानी लोक गायिका मरू कोकिला के नाम से सुविख्यात सीमा मिश्रा को उनके लोकसंगीत में अतुलनीय गरिमामय योगदान के लिए रीफा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से अलंकृत किया गया इस अवसर पर समारोह में उपस्थित समस्त जनसमूह ने खड़े होकर करतल ध्वनि के साथ मरु कोकिला सीमा मिश्रा का अभिवादन कर अपना स्नेह और सम्मान उनके प्रति प्रदर्शित किया। इस मौके पर अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीलेखा शर्मा ने कहा कि आज जिन कलाकारों और सृजनकर्ताओं का हम सम्मान कर रहे हैं, वे केवल व्यक्ति नहीं हैं—वे हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक हैं। आपका संघर्ष, आपकी साधना और आपकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। 


इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शिव विनायक शर्मा ने कहा कि राजस्थान केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि वीरता, संस्कृति, परंपरा और आत्मसम्मान की जीवंत पहचान है। यहाँ की माटी में शौर्य की सुगंध है और लोकसंस्कृति में जीवन का सच्चा रंग।यह समारोह हमारी समृद्ध राजस्थानी विरासत-लोकनृत्य, लोकसंगीत, वेशभूषा, भाषा और परंपराओं को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। आज के इस मंच से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हैं।



मैं इस भव्य आयोजन के लिए आयोजक मंडल को हृदय से बधाई और साधुवाद देता हूँ। इतने सुव्यवस्थित, गरिमामय और भावनाओं से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन करना आसान नहीं होता। इसके पीछे आप सभी की मेहनत, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। आपने न केवल कलाकारों को सम्मान देने का कार्य किया है, बल्कि हमारी लोकसंस्कृति को सम्मान का मंच भी प्रदान किया है—यह वास्तव में प्रशंसनीय है।



आज जिन विभूतियों का सम्मान किया जा रहा है, वे अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर समाज और संस्कृति को समृद्ध कर रहे हैं। ऐसे सम्मान समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं और युवाओं को प्रेरणा प्रदान करते हैं।

अंत में, मैं यही कहूँगा कि ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, हमारी संस्कृति यूँ ही फलती-फूलती रहे और राजस्थान की पहचान देश ही नहीं, बल्कि विश्व पटल पर और अधिक उज्ज्वल हो।

इस सम्मान एवं सांस्कृतिक समारोह का मुख्य आकर्षण

बीकानेर से आए प्रसिद्ध बीर्ड ग्रुप,साथ ही लोकप्रिय गायक-गायिकाओं सारेगामापा फैम रेनू नागर,आकांक्षा शर्मा, रिनी चंद्रा, अंचल भाट, रविन्द्र उपाध्याय एवं सरवर सरताज ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कार्यक्रम में राजस्थान के जाने-माने चेहरे विकल्प मेहता ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और पूरे आयोजन में उत्साह का संचार किया।राजस्थान का यह पहला ऐसा समारोह रहा जहां भारी संख्या में इनफ्लुएंसर मौजूद थे।

इस अवसर पर आयोजक नरेन्द्र सामोता, आज का यह अवसर हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं है, बल्कि यह उस जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसने राजस्थान को विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।

राजस्थानी कला और संस्कृति हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की ऊर्जा, चित्रकला की रंगीन छटा, हस्तशिल्प की बारीकी और हमारी बोलियों की मधुरता—ये सब मिलकर राजस्थान को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे जीवित रखने का दायित्व हम सबका है। हमारा यह आयोजन इस विश्वास के साथ किया गया है कि राजस्थानी कला और कलाकारों को और अधिक मंच मिलें राजस्थानी फिल्मों को प्रोत्साहन और दर्शक मिलें और हमारी भाषा व संस्कृति को उसका उचित सम्मान प्राप्त हो।


इसी क्रम में आयोजक मंडल के सदस्य प्रोड्यूसर एवं डायरेक्टर एसपी जोधा ने कहा कि राजस्थानी ऑडियो-वीडियो फिल्म, एल्बम हमारी संस्कृति को आधुनिक माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त साधन बन रहा है। राजस्थानी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि हमारी मिट्टी की खुशबू, सामाजिक मूल्यों, लोककथाओं और जीवन-दर्शन को बड़े परदे पर सजीव करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद हमारे फिल्मकारों, कलाकारों और तकनीशियनों ने जो समर्पण दिखाया है,वह प्रशंसनीय है।

आयोजक मंडल की सदस्य पायल कुम्बाज एवं किरण राठौड़ ने बताया कि इस समारोह के माध्यम से राजस्थान की कला, संस्कृति और प्रतिभाओं का सम्मान किया गया, जिसमें 35 से अधिक कैटेगरी में विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में राजस्थान सहित देशभर से विभिन्न क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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