शहीदों की शहादत पर बहुत सम्मान है मुझको,
शहादत उनकी हमको राष्ट्र की भक्ति सिखाती है।
वो सच्चे लाल माता के जो अपनी जान पर खेले, शहादत उनकी हमको राष्ट्र पर मिटना सिखाती है।
वो निर्भय वीर भारतभू जिन्हें प्राणों से भी प्रियतर,
शिवा सम सूर बढ़ते प्राण निज लेकर हथेली पर।
सदा जो शत्रुओं के शीश पर चढ़ते चरण रज धर ,
छूटें प्राण, पर न आँच आए, प्रिय तिरंगे पर ।
शहादत उनकी हमको राष्ट्र भक्ति पथ सिखाती है।(1.)
ये आज़ादी उन्हीं वीरों के बलिदानों से ही तो है,
सुकू की साँस आती उनकी ही कुरबानियों से है।
जिन्होंने अपने खूं से सींचा है प्यारा चमन हरदम,
हो शत्रु सामने और मुख से निकले 'वन्दे मातरम’।
शहादत उनकी हमको राष्ट्र की रक्षा सिखाती है (2)
वो ऐसे सूर्य थे जिनको स्वयं तपना ही आता था,
हो` सोते जागने पर राष्ट्रहित की धर्म भाता था ।
जो हँसकर मातृभू के वास्ते हर कष्ट सहते थे,
जो हो कुर्बा तिरंगे में सुकू` से लिपटे रहते थे ।
शहादत उनकी संघर्षों से ही
जीना सिखाती है।(3)
शहीदों की शहादत कितनी है अनमोल ये जानें।
लहू का कतरा-कतरा कर दिया कुर्बान ये जानें।
उन्हें कब स्वार्थ था प्यारा,जिन्हें हो राष्ट्र ही प्यारा, जिन्होंने हँसते-हँसते प्राण-धन सब राष्ट्र पर वारा।
शहादत उनकी हमको निस्वार्थ हो जीना सिखातीहै। (4)
चलो मिलकर चलें हम, स्मारकों पर उन शहीदों के, ऋणी हैं हम सभी जन, राष्ट्र के जिन-जिन शहीदों के।
झुकाएँ श्रद्धा से मस्तक, करें उनको नमन मन से, पुजारी मातृभू के थे सदा जो, तन से और मन से।
शहादत उनकी हमको राष्ट्र की पूजा सिखाती है (5)
शहीदों की शहादत का बहुत सम्मान है मुझको
शहादत उनकी हमको राष्ट्र की भक्ति सिखाती है।
शहीदों के प्रति हार्दिक श्रद्धा सुमन
चंद्रकला शास्त्री ‘चंद्र’
जयपुर, राजस्थान
एक टिप्पणी भेजें