कुछ नहीं कर पा रहा इंसान

 कुछ नहीं कर पा रहा इंसान


जब से कोरोना ने दस्तक दी है

ज़िन्दगी नरक सी बन गई है सब की

डर के साये में जी रहे हैं लोग

यह तो मर्जी है सिर्फ रब की

जिधर देखो आंसुओं का सैलाब है

लाशों को कम पड़ गए शमशान

आज तो सासें भी बिक रही हैं

कितना लालची हो गया है इंसान

सब को राजनीति की पड़ी है

बहुत मुश्किल की यह घड़ी है

आपदा में अवसर तलाश रहे हैं

रुक नहीं रही आंसुओं की झड़ी है

ऑक्सीजन की मारामारी है

हर तरफ बेबसी और लाचारी है

अपनों ने अपनों का साथ छोड़ दिया

कैसी खतरनाक यह महामारी है

शहरों को रौंदता अब बढ़ गया

गांवों की ओर यह तूफान

हलचल मचा दी शांत समुद्र में

कुछ नहीं कर पा रहा इंसान


रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं, बिलासपुर (हि.प्र.)


Post a Comment

और नया पुराने