मुसीबतसेमुक्ति
मुसीबत से मुक्ति होगी कब, यही प्रश्न है होंठो पर।
कब असर पड़ा है दुःखों का मक्कारो और झूठों पर।।
समय की बदली चाल बनी है प्राणों को दुखदाई।
इससे ज्यादा सहन ना होता मदद करो रघुराई।।
इस दुनिया में रोग से ज्यादा भूख से लोग मरे हैं।
घर भी अब तो जेल सा लगता रहते सभी डरे है।।
भगवान आप ही कोरोना की प्रतिरोधक हवा चलाओ।
नष्ट हो रहा जन जीवन, इस धरा की लाज़ बचाओ।।
जो भरे पेट लेटे है उनकी भी, नींद उड़ी रहती है ।
मज़दूरों की क्या हालत होगी ये कविता कहती रहती हैं।।
एक बार फिर से प्रभुवर , इस चमन को लहलहाओ।
आप विशिष्ट है हम सबके अब आप ही देश बचाओ।।
करन त्रिपाठी
हरदोई, उत्तर प्रदेश
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