kavita

बड़ा भाई

ज़िंदगी की घनी धूप में,बरगद सा वो खड़ा है  |  असंख्य संकटों से मेरे,सशक्त ढाल बन लड़ा है |  कहता नहीं …

भिखारी

भिखारी कुछ ढूँढ रहा है वो,कचरे में, जाने क्या....? रोटी या किस्मत अपनी। तन पर चिथड़े हैं कम, आँखें…

"कर्मफल"

"कर्मफल" " कर्मन्ये वा धी कारस्ते मां फलेसु कदाचन।" गीता का अत्यंत प्रभावी श्ल…

मुसीबतसेमुक्ति

मुसीबतसेमुक्ति मुसीबत से  मुक्ति होगी कब, यही  प्रश्न  है  होंठो पर।  कब असर पड़ा है दुःखों का मक्…

चक्रवात..

चक्रवात.. जब भी  दर्द की उष्मा का दबाव  घेर लेता है चारों तरफ़ से हमें  तब आता है  मन के अथाह सागर…

हम साथ-साथ हैं

हम साथ-साथ हैं रामु माली फूल तोड़कर लाता, और  हार बनाकर घर-घर देने जाता, एक दिन सड़क पार करते समय …

सजल

सजल ये समय बलवान था अब क्रूर कैसे हो गया। आदमी ही आदमी से दूर कैसे हो गया। संग साथी भी नहीं मन की …

ले चले मुझे....

ले चले मुझे.... कितने एहसासो को  जिऊँ मै? बोझिल थके कदमों से  अनगिनत सफ़र तय किए है मैंने टूटकर चक…

मानवता की परीक्षा है

मानवता की परीक्षा है ---------------------------------- एक ओर जहाँ लोग बेहाल भाग रहे यहाँ से वहाँ …

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