कोरोना को गायब कर दूँ पल भर में

 कोरोना को गायब कर दूँ पल भर में

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मेरे हाथों में जादू  दे दो ईश्वर।

कोरोना को गायब कर दूँ पल भर 

में।


गम में रोते लोगो को कैसे देखूँ?

जीवन खोते लोगो को कैसे देखूँ?

और बेबसी लाचारी कैसे देखूँ?

आँखे नम मैं मन भारी कैसे देखूँ?

कोशिश आज बचा लूं मैं मानवता को।

कोशिश सम्बल दूँ मैं मन की दृढ़ता को।

कैसे जीने दूँ लोगो को मैं डर-डर?

कोरोना को गायब कर दूँ पल भर में।


ऑक्सीजन से लेकर बेड हुए कम है।

लाशों के अम्बार,श्वास भरती दम है।

भरा हुआ है चीख पुकारों से मंजर।

जीता है इंसान यहाँ पर मर-मर कर।

फैला है जबसे कोरोना  घर-घर में।

दर्द दिखाई देता धरती अम्बर में।

लाश जलाने में जब लगता हो नम्बर ।

कोरोना को गायब कर दूँ पल भर में।


एक ओर से हाथ मदद को बढ़ते हैं।

लोग कहीं कालाबाजारी करते हैं।

कहीं आत्मा मरी,कहीं पर ज़िन्दा है।

कोरोना का काल बना क्यों धन्धा है।

इक दूजे का साथ निभाना ही होगा।

वक़्त कठिन है हाथ बढ़ाना ही होगा

भटक रहे हो लोग यहाँ पर जब दर-दर ।

कोरोना को गायब कर दूँ पल भर में।


बलराम निगम

बकानी, झालावाड़, राज.


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